फिल्म समीक्षा: ‘फ़ोर्स 2’ में हैं काफी फ़ोर्स

अरे चिंटू! यह शुक्रवार तो सीक्वल्स का शुक्रवार लग रहा है. ‘फ़ोर्स 2‘ और ‘तुम बिन 2‘ जैसी दो ऐसी फिल्में रिलीज़ हो रही हैं जोकि पहले आ चुकीं दो सफल फिल्मों का अगला भाग हैं. तो तुम किस फिल्म का रिव्यू पहले ला रहे हो अपने रीडर्स के लिए?

भाई, मेरा फेवरेट जॉनर तो एक्शन-थ्रिलर है. मुझे अच्छा लगेगा अगर तुम ‘फ़ोर्स 2’ का रिव्यू पहले बता दो. वो क्या है कि फिल्म के टिकट्स भी तो एडवांस में बुक कराने हैं. 500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद छुट्टे पैसे की बड़ी मारामारी है, भाई. फिल्म के टिकट्स के लिए 2000 के नोट खुलाने के लिए थोड़ा वक़्त तो चाहिए ही, सही कहा न?

चलिए, आपकी फ़रमाइश सर आंखों पर रखते हुए हम आपके सामने सबसे पहले ला रहे हैं जॉन अब्राहम और सोनाक्षी सिन्हा अभिनीत ‘फ़ोर्स 2’ का रिव्यू. आइये जानते हैं कि फिल्म देखने के लिए आपको अपना 2000 का नोट भुनाने की सच में जरूरत है कि नहीं.

कहानी

फिल्म के पहले भाग में ड्रग्स का काला कारोबार करने वाले निर्दयी विष्णु (विद्युत जामवाल) को मौत के घाट उतारने के बाद मुम्बई पुलिस में कार्यरत एसीपी यशवर्धन (जॉन अब्राहम) के कन्धों पर अब एक नयी और अहम ज़िम्मेदारी है – जिम्मेदारी एक आम से दिखने वाले खूंखार आतंकी शिव (ताहिर राज भसीन) को ढूंढकर उसे कानून के हवाले करने की, जिसने रॉ एजेंट्स को ख़त्म करने की कसम खाई है. इस खतरनाक मिशन में उसका साथ देती है तेज-तर्रार रॉ एजेंट के.के (सोनाक्षी सिन्हा). तो क्या यशवर्धन और के.के की जोड़ी शिव को पकड़कर दुनिया भर में फैले रॉ एजेंट्स की गरिमा बचा पाएंगे या नहीं? जानने के लिए देखें इस फिल्म को अपने नज़दीकी सिनेमाघरों में.

स्क्रिप्ट और निर्देशन

2011 में रिलीज़ हुई ‘फ़ोर्स’ तमिल फिल्म ‘काखा काखा’ की हिंदी रीमेक थी, जबकि ‘फ़ोर्स 2’ एक ओरिजिनल स्क्रिप्ट पर बनी फिल्म है. फिल्म की कहानी में उतना ही दम है जितना कि जॉन की बलशाली बाजुओं में. फिल्म के डायलॉग्स प्रभावशाली हैं, और स्क्रीनप्ले भी. लेकिन शायद फिल्म के सेकेंड हाफ को और बहेतर एडिटिंग की जरूरत थी.

बात करें निर्देशन की, तो ‘फ़ोर्स’ फ्रैंचाइज़ की पहली फिल्म का निर्देशन किया था निशिकांत कामत ने, जबकि दूसरी फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है अभिनय देव को. जब आप फिल्म देखेंगे तो पाएंगे कि अभिनय ने भी इस फिल्म पर उतनी ही शिद्दत से काम किया है जितना कि निशिकांत ने पहली फिल्म पर. उनका निर्देशन सराहनीय है. उम्मीद है कि भविष्य में वो ‘फ़ोर्स 2’ जैसी कई बहेतरीन एक्शन फिल्मों का निर्देशन करेंगे. फिल्म की सिनेमेटोग्राफी काफी शानदार है.

अभिनय

ऐसी बहुत ही कम फिल्में होती हैं जिनमें जॉन अब्राहम की एक्टिंग की तारीफ़ हो. लेकिन जब ‘फ़ोर्स’ 2011 में रिलीज़ हुई थी तो न सिर्फ दर्शकों ने बल्कि फिल्म समीक्षकों ने भी फिल्म में जॉन के अभिनय को सराहा. और आज जब लगभग चार साल बाद फिल्म का दूसरा भाग ‘फ़ोर्स 2’ रिलीज़ हुआ तो एक बार फिर से जॉन ने ऐसी परफॉरमेंस दी है जिसकी तारीफ़ की जा सके. ये हम सब जानते हैं कि एक्शन सीन्स में जॉन का कोई मुकाबला नहीं. इस फिल्म में भी उन्होंने हैरतअंगेज़ कर देने वाले एक्शन सीन्स को बखूबी अंजाम दिया है. इस बात का श्रेय फिल्म के एक्शन कोरियोग्राफर्स को भी उतना जाता है जितना कि जॉन को.

सोनाक्षी सिन्हा ने तो अब एक्शन सीन्स करने में महारत हासिल कर ली है. ‘अकीरा‘ के बाद ये उनकी दूसरी फिल्म है जिसमें उनको गुंडों को पीटते देख दर्शक अपने दांतों तले अंगुली दबा लें. उन्होंने जॉन के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर दुश्मनों को लोहे के चने चबवाये हैं. कहते हैं एक एक्शन-थ्रिलर फिल्म तभी अच्छी बनती है जब उसका विलेन हीरो के माफ़िक ही पावरफुल हो. डील-डौल में फिल्म के विलेन ताहिर राज भसीन जॉन जैसे भले न हों, लेकिन फिल्म में उन्होंने परफॉरमेंस जॉन के लेवल की ही दी है. रानी मुख़र्जी की फिल्म ‘मर्दानी’ से सुर्ख़ियों में आये ताहिर ‘फ़ोर्स 2’ में पहली ‘फ़ोर्स’ के विलन विद्युत जामवाल की कमी कहीं पर भी महसूस नहीं होने देते. हम उम्मीद करते हैं कि वह अपनी अगली फिल्म साइन करने में ज्यादा वक़्त नहीं लेंगे और जल्द ही हम उन्हें और फिल्मों में देखेंगे.

गीत-संगीत

फिल्म के एल्बम में कुल मिलाकर चार गाने हैं. इनसे से एक आइटम नंबर, जोकि श्रीदेवी के हिट गाने ‘काटे नहीं कटते ये दिन ये रात’ का आधुनिक संस्करण है जो फिल्म के सेकेंड हाफ में आता है और एक गाना फिल्म के ख़त्म होने के बाद में. लेकिन फिल्म का कोई भी सॉन्ग ऐसा नहीं हैं जिसे आप कुछ दिनों से ज्यादा सुन सकें.

देखें या न देखें

यह बात ठीक है कि एक एक्शन फिल्म को सफल बनाने के लिए उसमें विश्वस्तरीय एक्शन कूट कूट-कर भरा हो. सच पूछें तो जब तक हवा में पतंग सी उड़ती गाड़ियां न हों और गुंडों को छठी का दूध याद दिला देने वाला सिक्स पैक्स से धनी लंबा-चौड़ा हीरो न हो तो मजा नहीं आता है. लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं कि फिल्म के दूसरे अहम पहलुओं को सिरे से नज़रअंदाज़ कर दिया जाए. घबराइये नहीं, ‘फ़ोर्स 2’ के मेकर्स ने ऐसी कोई गलती नहीं की है. उन्होंने फिल्म के हर एक पक्ष पर अच्छे से काम किया है और आपके सामने मनोरंजन से लबालब एक एंजोयबल फिल्म प्रस्तुत की है.

 

फिल्म का नाम: फ़ोर्स 2

अरे चिंटू रेटिंग: 4 स्टार्स

निर्देशक: अभिनय देव

कलाकार: जॉन अब्राहम, सोनाक्षी सिन्हा, ताहिर राज भसीन

शैली: एक्शन-थ्रिलर

संगीत: गौरव रोशिन

अवधि: 2 घंटे 6 मिनट

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