फिल्म समीक्षा- शानदार कहानी और अभिनय का मिश्रण है ‘लखनऊ सेंट्रल’

अरे चिंटू, आज फरहान अख्तर और डायना पेंटी स्टार फिल्म ‘लखनऊ सेंट्रल रिलीज’ हो गई. तो बताना जरा फिल्म की कहानी कैसी है. फिल्म में कैरेक्टर्स के अभिनय कैसे हैं..जल्दी जल्दी बताओ.

कहानी

फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में रहने वाले एक युवक की है. जो एक सिंगर है और अपना एक बैंड बनाना चाहता है. वो लोक गायक मनोज तिवारी का बहुत बड़ा फैन होता है. इसी दौरान वो एक बार मनोज तिवारी के एक लाइव शो में गया होता है. जहां पर एक आईएएस की हत्या हो जाती है. जिसके कत्ल का इल्जाम इस पर आ जाता है. और उसे लखनऊ सेंट्रल में फांसी की सजा के तहत जेल भेज दिया जाता है. जेल में अपने फांसी का इंतजार कर रहे कैदी कृष्ण मोहन गिरहोत्रा यानि की फरहान अख्तर की जिंदगी में उस वक्त बदलाव आता है. जब एक एनजीओ कार्यकर्ता गायत्री कश्यप यानिकि डायना पेंटी आने वाले 15 अगस्त के मौके पर जेल के अलग- अलग कैदियों का एक बैंड बनाना चाहती है. इसके लिए कृष्ण मोहन तैयार हो जाता है. और इसके लिए अपने और साथियों दीपक डोबरियाल, राजेश शर्मा, गिप्पी ग्रेवाल, इनामुलहक को वो इसके लिए तैयार करता है. इन कैदीयों की यह हरकत जेलर बने रोनित रॉय को अच्छी नहीं लगती और वो तरह तरह से परेशान करना शुरू करता है. और आखिरी में क्या होता इसके लिए आपको नजदीकी सिनेमाघरों का रुख करना पड़ेगा।Lucknow-Central

स्क्रिप्ट और डायरेक्शन

फिल्म के स्क्रिप्ट की बात करें तो इसे लिखा है रंजित तिवारी और असीम अरोड़ा ने. फिल्म को रंजीत तिवारी ने ही डायरेक्ट किया है. फिल्म की स्क्रिप्ट बहुत ही अच्छे तरीके से लिखा गया है. फिल्म में आपको हर एक तरह के इमोशनल सीन्स देखने को मिलेंगे. आप कई सीन्स को देखते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाएंगे. स्क्रिप्ट को और भी मजबूत बना देते हैं कलाकारों के अभिनय. फरहान अख्तर के दमदार अभिनय ने फिल्म के लेखक की लिखावट को बेहतरीन मजबूती दी है. डायरेक्शन में भी रंजित तिवारी ने बेहतर काम किया है. फिल्म में आपको एक आध जगह छोड़कर पूरी फिल्म बहुत बेहतर लगेगी.

अभिनय

किसी भी फिल्म की सफलता उसमें काम कर रहे कलाकारों के अभिनय पर भी निर्भर करती है. तो डायरेक्टर रंजीत तिवारी ने फिल्म में सही कलाकारों का सिलेक्शन कर फिल्म के सफल होने की एक मियाद तो पूरी कर दी. फिल्म में फरहान अख्तर, जो कि हमेशा अपनी दमदार एक्टिंग से लोगों को प्रभावित करते हैं, इस बार भी फरहान अपने दमदार अभिनय से सभी को प्रभावित करने में काफी सफल हुए हैं. और किरदारों की बात करूं तो सभी ने अपने रोल के साथ न्याय किया है. फिल्म में रोनित रॉय जिनकी इमेज एक विलेन के रूप में बनती जा रही है. इस बार भी पुलिस वाले के रोल में वो जबरदस्त दिख रहे हैं. इनका यह कैरेक्टर काफी हद तक बॉस के पुलिस वाले रोल से मिलता जुलता है.

गीत-संगीत

फिल्म के संगीत की बात करें तो इसके गाने ‘कांवा..कांवा…’, ‘मीर-ए-कारवां..’ और ‘तीन कबूतर…’ काफी हिट हुए और लोगों ने इन गानों की काफी तारीफ की. फिल्म में अर्जुन हार्जले, सुखविंदर सिंह, माइकल दन्ना, रोचक कोहली और तनिष्क बागची ने. फिल्म के गानें ऐसे नहीं है जो लंबे समय तक लोगों के जुबान पर बने रहेंगे. लेकिन जब फिल्म देख कर निकलेंगे तो जरूर गुनगुना रहे होंगे.

देखें या न देखें

फिल्म इंटरवल के पहले काफी कसी हुई है. इंटरवल के बाद कहानी थोड़ी बोरिंग से होने लगती है. लेकिन कलाकारों की दमदार अभिनय दर्शकों को रोकने में कामयाब हो जाती है. तो इस फिल्म को देखने की सबसे अच्छी वजह है कि आपको फरहान अख्तर की दमदार एक्टिंग देखने को मिलेगी. और यह कहानी जेलों में बंद उन कैदियों की रियल कहानी है जो कुछ और जिंदगी में करना चाहते थे और झूठे केसेज में फंस कर जेल में सजा काट रहे हैं. तो इसको देखेंगे तो आपको कई रियल फैक्ट्स के बारे में जानकारी मिलेगी. तो अरे चिंटू आपसे कहता है कि इस फिल्म को एक बार तो जरूर देखें..

फिल्म– लखनऊ सेंट्रल

रेटिंग– 3 स्टार

डायरेक्टर– रंजीत तिवारी

कलाकार– फरहान अख्तर, डायना पेंटी, दीपक डोबरियाल, राजेश शर्मा, गिप्पी ग्रेवाल, रोनित रॉय, इनामुलहक, मनोज तिवारी और रविकिशन

शैली– इमोशनल ड्रामा

गीत-संगीत– अर्जुन हार्जले, सुखविंदर सिंह, माइकल दन्ना, रोचक कोहली और तनिष्क बागची

अवधि- 2.27 घंटे

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