फिल्म समीक्षा: ज़िन्दगी के प्रति और आशावान बनाती है ‘डियर ज़िंदगी’

अरे चिंटू! तीन-तीन फिल्में आ रही हैं इस शुक्रवार अपनी किस्मत टिकट खिड़की पर आजमाने के लिए. तुम्हें क्या लगता है कि कौन सी फिल्म किसको मात देगी? अगर मुझसे पूछो तो मैं तो अपनी आलिया की टीम में हूं. ‘शानदार’ को छोड़कर आलिया ने मुझे आज तक कभी निराश नहीं किया है. उम्मीद करता हूं कि ‘डियर ज़िंदगी‘ देखने के बाद वह मेरी और भी डियर हो जाएंगी. तो ज़रा बताओ तुम क्या सोचते हो फिल्म के बारे में…

यह बात सोलह आने सच है कि आलिया भट्ट करंट जनरेशन की सबसे सफल और बहुमुखी प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में से एक हैं. वर्ष 2012 में करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर’ से अपने फ़िल्मी करियर का आगाज़ करने वाली डायरेक्टर-राइटर महेश भट्ट की इस छोटी बेटी ने बहुत ही कम समय में अपनी एक अलग ही पहचान बना ली है. तो क्या ‘टू स्टेट्स,’ ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया, और ‘कपूर एंड सन्स‘ जैसी सफल फिल्में दे चुकी आलिया ‘डियर ज़िन्दगी’ में एक बार फिर अपना जादू चलाने में सफल रहेंगी कि नहीं. आइये जानते हैं.

कहानी

फिल्म की कहानी चुलबुली और चंचल काएरा (आलिया भट्ट) के इर्द-गिर्द घूमती है. पेशे से एक होनहार सिनेमेटोग्राफर, काएरा एक परफेक्ट लाइफ की तलाश में है. किस्मत एक दिन उसे जहांगीर खान उर्फ़ जग (शाहरुख़ खान) से मिलाती है, जो ज़िन्दगी को नए मायने तलाशने में उसकी मदद करता है. ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव से जुड़े हर सवाल का जवाब है जग के पास. जैसे ही काएरा अपनी ज़िन्दगी को नए सिरे से देखना शुरू करती है वैसे ही वह कमियों में भी खुशियां तलाशने का हुनर सीख जाती है. फिल्म में इसके अलावा और क्या होता है यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

स्क्रिप्ट और डायरेक्शन

फिल्म ‘डियर ज़िंदगी’ एक बार फिर से ये बात पूरी तरह साबित करती है कि एक फिल्म का असली नायक उसकी कहानी होती है. इस फिल्म के हर एक सीन और हर एक डायलॉग को बहुत ही समझदारी से लिखा गया है. फिल्म का कोई भी सीन ऐसा नहीं है जो आपको कुछ सोचने पर मजबूर न कर दे. और जब एक मजबूत कहानी को एक काबिल निर्देशक का साथ मिल जाये तो तो फिर सोने पर सुहागा वाली बात हो जाती है. गौरी शिंदे ने अपनी पहली फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ से ही जता दिया था कि वो बॉलीवुड में लंबी पारी खेलने का माद्दा रखती हैं. उनकी यह नयी पेशकश उन्हें इंडस्ट्री के टॉप के निर्देशकों की कतार में ला खड़ा करेगी. अब अगर फिल्म के कमजोर पॉइंट्स पर नज़र डाली जाए, तो मेरा यही मानना है कि फिल्म को बहेतर एडिटिंग की जरूरत थी, खासकर फिल्म के सेकंड हॉफ़ को. आखिर तक आते आते आप यही सोचते हैं कि फिल्म कब ख़त्म होगी.

अभिनय

शाहरुख़ खान की फिल्में बॉक्स-ऑफिस पर कोई धमाल मचाएं या न मचाएं, लेकिन उनके अभिनय कौशल पर कोई शक़ नहीं कर सकता. वैसे इस फिल्म में वह एक एक्सटेंडेड कैमिया में है लेकिन उनकी उपस्थिति फिल्म को वजन देती है. वह अपने किरदार में खूब जचते हैं. जब वह आलिया को जिंदगी या प्यार पर कोई सुझाव देते हैं तो आप बस यही सोचते रह जाते हैं कि काश वह आपको भी किसी मसले पर सलाह दे दें और आप उनको बस सुनते जाएं.

बात करें अगर आलिया की, तो वह इस फिल्म में भी शानदार है. फिल्म में आलिया का किरदार कुछ वैसा ही है जैसी वो अपने निजी जीवन में हैं – चुलबुली, चंचल और हमेशा मुस्कुराते रहने वाली. यह फिल्म उनके करियर ग्राफ को काफी ऊपर लेकर जाएगी. शाहरुख़ और आलिया के अलावा आप फिल्म में इरा दुबे, कुणाल कपूर, अली ज़फर, अंगद बेदी जैसे कलाकारों को भी छोटी-छोटी भूमिकायों में देख पाएंगे. उन सबने भी अपने किरदारों को अच्छे से निभाया है.

संगीत

फिल्म में संगीत दिया है अमित त्रिवेदी ने. वह अपनी प्यारी धुनों से सुनने वालों के दिल और दिमाग पर हमेशा अपना जादू चलाने में सफल रहते हैं. इस बार भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है. इस फिल्म में आपको कुछ बहुत ही अच्छे गाने मिलेंगे. मसलन अरिजीत सिंह का गाया हुआ गाना ‘ऐ ज़िंदगी गले लगा ले,’ जोकि कमल हासन और श्रीदेवी की कल्ट फिल्म ‘सदमा’ का मॉडर्न वर्जन है, फिल्म के सभी गानों में से सबसे अच्छा गीत बनकर उभरा है. यह गाना आपको उतना ही अच्छा लगेगा जितना कि आपको ओरजिनल सांग अच्छा लगा होगा. ‘लव यू ज़िन्दगी, ‘तू ही है’ और ‘तारीफों से’ आदि गाने इस फिल्म के संगीत को शानदार बनाते हैं. सभी गानों के लिरिक्स भी काफी प्रभावशाली हैं. कुल मिलाकर अमित त्रिवेदी और गीतकार कौसर मुनीर ने ‘डियर जिंदगी’ के गीतों को बेहतरीन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

देखें या न देखें

शाहरुख़ खान और आलिया भट्ट जैसे ए-लिस्ट के सितारों से सजी इस फिल्म में आपको टिपिकल बॉलीवुड नाच-गाना और मार-धाड़ जैसे कमर्शियल मसालों की मात्रा जरा कम मिलेगी, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि फिल्म फीकी है. अगर आप एक साफ़-सुथरी फिल्म देखना चाहते हैं, तो आपको यह फिल्म बिल्कुल नहीं मिस करनी चाहिए. ज़िंदगी जीने का एक नया तरीका सिखाती है आपको ‘डियर ज़िंदगी’. इस फिल्म से आप खुद को आसानी से रिलेट कर सकते हैं. फिल्म देखते वक़्त आप कहीं न कहीं अपने आप को फिल्म के किसी न किसी किरदार में तलाशते नज़र आएंगे. कुल मिलाकर ‘डियर ज़िन्दगी’ एक ऐसी फिल्म है जिसे कम से कम एक बार देखना तो बनता है.

फिल्म का नाम: डियर ज़िन्दगी

अरे चिंटू रेटिंग: 4 अंक

कलाकार: आलिया भट्ट, शाहरुख खान, इरा दुबे, कुणाल कपूर, अली ज़फर, अंगद बेदी

निर्देशक: गौरी शिंदे

निर्माता: गौरी खान, करण जौहर, गौरी शिंदे

संगीत निर्देशक: अमित त्रिवेदी

शैली: कॉमेडी-ड्रामा

अवधि: 2 घण्टे 35 मिनट

नीचे दिए बटन को क्लिक करके इस पोस्ट को मित्रों में शेयर करें