फिल्म समीक्षा: साहस के साथ सपनों की उड़ान भरने की कहानी है ‘दंगल’

अरे चिंटू! साल की सबसे बड़ी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है, लेकिन तुम्हारा रिव्यू अभी तक नहीं आया. जरा जल्दी बताओ कि फिल्म कैसी है. मुझसे अब इंतज़ार नहीं हो रहा.

‘पीके’ की सफलता के बाद आमिर ख़ान पूरे दो साल के अंतराल के बाद फिल्म ‘दंगल‘ के साथ दर्शकों के सामने हाज़िर हैं. क्या उनकी नयी पेशकश उनकी पिछली कुछ फिल्मों की सफलता को दोहरा पाएंगी या नहीं? आइये जानते हैं.

कहानी

असल ज़िंदगी से प्रेरित फिल्म की कहानी एक ऐसे महत्वाकांक्षी पिता महावीर सिंह फोगट (आमिर ख़ान) के इर्द-गिर्द घूमती हैं जिसने देश के लिए रेसलिंग में गोल्ड मेडल लाने के अपने अधूरे सपने को पूरा करने के लिए अपनी बेटियों, गीता (फातिमा सना शेख) और बबिता (सान्या मल्होत्रा) को पहलवानी सिखाने का निर्णय लिया है. समाज के तानों की परवाह किये बगैर कैसे महावीर अपनी बेटियों को रेसलिंग की दुनिया का चैंपियन बनाता है, जानने के लिए आप यह फिल्म अपने नज़दीकी सिनेमाघरों में देख सकते हैं. फिल्म आज यानि कि 23 दिसम्बर को प्रदर्शित हो चुकी है.

स्क्रिप्ट और डायरेक्शन

फिल्म की कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है. अति उपदेशात्मक हुए बगैर यह ऐसी बातें कह जाती है जिन्हें आप कभी नहीं भूल सकते. नीतेश तिवारी, पियूष गुप्ता, श्रेयस जैन और निखिल मेहरोत्रा ने मिलकर इस फिल्म की कहानी को लिखा है. फिल्म का स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स काफ़ी प्रभावशाली हैं. ‘दंगल’ में आप कई ऐसे सीन्स देखेंगे जहां पर शब्दों का कोई इस्तेमाल नहीं किया गया है, लेकिन अपने मजबूत स्क्रीनप्ले के चलते वे दृश्य आपके ह्रदय में एक अमिट छाप छोड़ जाते हैं.

बात करें अगर डायरेक्शन की, तो यह कहना गलत नहीं होगा इस फिल्म के बाद निर्देशक नीतेश तिवारी का करियर एक नई दिशा में जायेगा. यह फिल्म उन्हें एक नयी लीग में ला खड़ा कर देगी.

अभिनय

फिल्म में अगर आमिर खान हैं तो वह एक अभिनय प्रधान फिल्म ही होगी, इस बात की तो गारंटी है. ‘दंगल’ को आमिर के करियर की सबसे उम्दा फिल्म कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. उन्होंने अपने अभिनय से एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उन्हें मिस्टर परफेक्शनिस्ट ऐसे ही नहीं कहा जाता. वह हर सीन में ऐसा परफेक्शन लेकर आते हैं कि देखने वाले बस देखते ही रह जाएं. एक अधेड़ इंसान का किरदार निभाना कोई आसान बात नहीं है, लेकिन आमिर ने न सिर्फ महावीर सिंह के किरदार को बेहतरीन तरीके से जिया बल्कि उनके जैसा दिखने के लिए वजन भी बढ़ाया. साक्षी तंवर फिल्म में आमिर की पत्नी के किरदार में नज़र आती हैं. उन्होंने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है. फिल्म में अनेक सीन्स भले ही कम हों, लेकिन वह जिस दृश्य  में भी नज़र आयी हैं, उसमें आमिर की मौजूदगी के बावजूद भी वह अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहती हैं. फिल्म की असली जान हैं फातिमा सना शेख जोकि आमिर की बेटी गीता के किरदार में देखी जा सकती हैं. उन्होंने अपने किरदार में जान डालने के लिए कितनी मेहनत की है इसका अंदाज़ा आप फिल्म देखे बिना नहीं लगा सकते. आमिर के बाद अगर किसी और कलाकार ने फिल्म के लिए सबसे ज्यादा मेहनत की होगी तो वह फातिमा ही हैं. सान्या मल्होत्रा भी बबिता के किरदार में जान फूंकने में सफल रहती हैं.

गीत-संगीत

कहते हैं कि अगर किसी फिल्म का संगीत लोगों को पसंद आ जाये, तो उस फिल्म के बॉक्स-ऑफिस पर चलने की संभावना काफ़ी हद तक बढ़ जाती है. इस फिल्म के तो सभी गानें सुनने वालों की ज़ुबान पर चढ़े हुए हैं. फिर चाहें बात हो ‘हानिकारक’ गीत की या फिर ‘धाकड़’ की. संगीतकार प्रीतम के संगीत में आपको हरियाणा की मिटटी की खुशबू बिना किसी ख़ास कोशिश के मिल जाएगी. फिल्म के गाने लिखे हैं अमिताभ भट्टाचार्य ने. उनके गानों के बोल आम बोलचाल की भाषा के हिसाब से थोड़े मुश्किल जरूर लग सकते हैं, लेकिन एक बार ज़ुबान पर चढ़ने के बाद उतरने का नाम नहीं लेते.

देखें या न देखें

दंगल न सिर्फ इस साल की बल्कि आमिर खान के 25 साल से भी ज्यादा के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म है. इस फिल्म में आपको वह सब कुछ देखने को मिलेगा जिसे आप एक अच्छी पारिवारिक फिल्म में देखना चाहते हैं. निर्देशक नीतेश तिवारी ने सभी किरदारों के साथ-साथ फिल्म की कहानी को इतनी अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है कि आप ‘दंगल’ एक नहीं बार-बार देखना चाहेंगे. अगर वीकेंड की टिकट्स मिलने में मुश्किल आ रही हो तो अगले किसी दिन की टिकेट बुक करा लें, लेकिन यह फिल्म मिस न करें.

फिल्म का नाम: दंगल

रेटिंग: 4 स्टार्स

डायरेक्टर: नीतेश तिवारी

कलाकार: आमिर खान, साक्षी तंवर, फातिमा सना शेख,

गीत-संगीत: प्रीतम

शैली: स्पोर्ट्स बायोपिक

अवधि: 2 घंटे 41 मिनट

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