फिल्म समीक्षा: बेफिक्र होकर देखें फुल मसाला एंटरटेनर ‘बेफिक्रे’

‘उड़े दिल बेफिक्रे, उड़े दिल बेफिक्रे…’ जब से ये गाना सुना है, तब से ये जुबान पर ऐसा चढ़ा है कि उतरने का नाम ही नहीं ले रहा. मेरी छोड़ो, मुझे तो लगता है कि आजकल हर कोई बस फिल्म ‘बेफिक्रे’ का ही कोई न कोई गाना गुनगुना रहा है. अरे चिंटू, लेकिन मेरा सवाल यह है कि क्या यह फिल्म भी उतनी ही शानदार है जितने कि इसके गाने? यकीन है कि तुमने अब तक फिल्म तो देख ही ली होगी, तो फिर रिव्यू लाने में इतनी देरी क्यों? जरा जल्दी करो और फिल्म का रिव्यू तो लेकर आओ हमारे लिए. जरा हम भी तो जान लें कि क्या खास बात है इस फिल्म में.

‘दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे,’ ‘मोहब्बतें’ और ‘रब ने बना दी जोड़ी’ के बाद निर्माता-निर्देशक आदित्य चोपड़ा एक निर्देशक के रूप में लेकर आएं हैं अपनी चौथी फिल्म. इससे पहले उन्होंने जितनी भी फिल्में बनाई हैं उन फिल्मों ने बॉक्स-ऑफिस पर सफलता की नई परिभाषाएं गढ़ीं. निर्देशक के तौर पर उनकी पहली फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ ने तो मुंबई स्थित मराठा मंदिर सिनेमाघर में लगातार 20 साल तक चलने का रिकॉर्ड बनाया है. कुछ दिनों तक रुकने के बाद फिल्म का मॉर्निंग शो यहां अभी भी चलता है. इस तरह का रिकॉर्ड भारतीय सिनेमा में अभी तक नहीं बना था. आदित्य की ‘बेफिक्रे’ नाम की नई पेशकश से ऐसी कोई उम्मीद करना बेईमानी होगी, क्योंकि आज वक्त काफी बदल चुका है. लेकिन फिर भी हम इतनी उम्मीद तो कर ही सकते हैं कि फिल्म पैसा वसूल हो. तो फिर देर किस बात की? आइये फिल्म की विस्तृत समीक्षा में जानने की कोशिश करते हैं कि कैसी है यह फिल्म…

कहानी:

जैसा कि आपको फिल्म के नाम से ही अंदाजा हो गया होगा कि यह जिंदगी को बिना किसी फिक्र, टेंशन और प्रेशर के साथ जीने के फलसफे के बारे में हैं. फिल्म की कहानी शुरू होती है दिल्ली के नौजवान छोरे धरम (रणवीर सिंह) के साथ. वो अपने बिजनेस के सिलसिले में पेरिस आता है जहां पर उसकी मुलाकात होती है जिन्दगी को अपनी शर्तों पर जीने वाली शायरा (वाणी कपूर) से. शायरा अपनी लाइफ में कुछ भी प्लान नहीं करती है. जिंदगी उसे जहां और जैसे ले जाना चाहती है वो वहां वैसे ही चल देती है. जब उसकी मुलाकात धरम से होती है तो बिना वक्त गंवाए दोनों अच्छे दोस्त बन जाते हैं, या फिर कहें “फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स”. दोनों कई मामलों में एक दूसरे से अलग हैं और कई मामलों में बिल्कुल एक जैसे. लेकिन एक बात को लेकर दोनों बिल्कुल साफ हैं कि वे एक दूसरे से कभी प्यार नहीं करेंगे. लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है? जब एक जवान लड़का एक खूबसूरत लड़की से पेरिस की हसीन वादियों में मिले, तो इश्क होना तो लाजिमी है. तो कैसे ये दोनों सब कुछ भुलाकर प्यार करने की हिम्मत करते हैं, फिल्म ‘बेफिक्रे’ में आपको यह सब देखने को मिलेगा.

स्क्रिप्ट और डायरेक्शन

फिल्म की कहानी नया होने का दावा नहीं करती, लेकिन फिर भी आप इसे बिना बोर हुए पूरी तरह से एन्जॉय कर सकते हैं. फिल्म के निर्देशन के साथ-साथ आदित्य चोपड़ा ने इस फिल्म की कहानी भी लिखी है. बदलते ज़माने को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी कहानी को मॉडर्न टच दिया है और वह अपनी इस कोशिश में पूरी तरह से सफल भी होते हैं. फिल्म के डायलॉग्स काफ़ी एंटरटेनिंग और फनी हैं. बात करें अगर डायरेक्शन की, तो आदित्य चोपड़ा के डायरेक्शन पर संदेह नहीं किया जा सकता. उन्होंने बॉलीवुड की कुछ सबसे सफल फिल्मों का निर्देशन और निर्माण किया है. उनकी यह नयी पेशकश भी काबिल-ए-तारीफ़ है. बड़े शहरों में मॉडर्न रिलेशन्सशिप्स की क्या परिभाषा होती है, आदित्य उसे पर्दे पर उतारने में एक पल को भी नहीं चूकते.

अभिनय

ये कहना गलत नहीं होगा कि रणवीर सिंह में अगले सुपरस्टार की सभी क़्वालिटीज़ मौजूद हैं. अगर ‘बाजीराव मस्तानी’ जैसी पीरियड फिल्म में वह एक पेशवा का किरदार बिना किसी शंका के निभा सकते हैं, तो ‘बेफिक्रे’ जैसी हल्की-फुल्की रोमांटिक फिल्म में वह एक हरफ़नमौला लड़के का किरदार भी उसी इमानदारी से कर सकते हैं. उनके अभिनय में काफ़ी वैराइटी है. रणवीर फिल्म ‘बेफिक्रे’ की जान हैं. फिल्म पूरी तरह से उनके ही कन्धों पर टिकी है. फिल्म की मुख्य हेरोइन हैं वाणी कपूर. ‘शुध्द देसी रोमांस’ से अपना फ़िल्मी सफर शुरू करने वाली वाणी अपनी दूसरी फ़िल्म में बस ठीक ठाक लगती हैं. अभी उन्हें अपने अभिनय कौशल पर काफ़ी काम करने की जरूरत है. रणवीर के साथ कई सीन्स में वह थोड़ी कमजोर नज़र आती हैं. लेकिन उन्होंने कोशिश पूरी की है कि वह अपने किरदार के साथ न्याय कर सकें.

गीत-संगीत

फिल्म ‘बेफिक्रे’ का म्यूजिक दिया है विशालशेखर की हिट जोड़ी ने. दोनों ही म्यूजिक कम्पोजर्स अपने यूथफुल म्यूजिक के लिए जाने जाते हैं. इस फिल्म में भी उन्होंने ऐसा संगीत दिया है कि जिसे सुनने के बाद आप झूमे बिना नहीं रह सकते हैं. ‘बेफिक्रे’ में कुल मिलाकर 7 गाने हैं, और सातों के सातों गाने न सिर्फ फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाते हैं बल्कि आप पर ऐसा असर छोड़ते हैं कि फिल्म देखने के बाद आप कम से कम एक बार तो उन्हें अपने मोबाइल फोन पर या फिर किसी एफएम चैनल पर सुनने की कोशिश जरूर करेंगे. फिल्म के गानों की एनर्जी मेन लीड रणवीर सिंह और वाणी कपूर के एनर्जी लेवल से बिल्कुल मैच करती है. फिल्म में अगर आप मेरे पसंदीदा गाने की बात करेंगे तो मुझे अरिजीत सिंह का गाया हुआ ‘नशे सी चढ़ गई’ बेहद पसंद आया. इस गाने की धुन और संगीत ऐसा है कि आप इसे बार-बार सुने बिना नहीं रह सकते. बेनी दयाल की आवाज से सजा हुआ फिल्म का टाइटल ट्रैक ‘उड़े दिल बेफिक्रे’ भी आपको काफी पसंद आ सकता है. इसी तरह से फिल्म के सभी गाने बेहद अच्छे हैं. आपके टेस्ट के हिसाब से कोई भी गाना आपका फेवरेट हो सकता है.

देखें या न देखें:

फिल्म की कहानी युवाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है. लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि यह सिर्फ एक वर्ग विशेष को ही आकर्षित करेगी. माना कि इस फिल्म की ऑडियंस में सबसे ज्यादा संख्या यंगस्टर्स की होगी, लेकिन ‘बेफिक्रे’ हर वर्ग की ऑडियंस को पसंद आ सकती है. फिल्म में आप पेरिस की शानदार लोकेशन्स का लुत्फ अपने नजदीकी सिनेमाहॉल में बैठकर ही उठा सकते है. आपको कहीं और जाने की जरूरत नहीं. रणवीर कपूर की एनर्जी से लबालब और नाचने को मजबूर कर देने वाले म्यूजिक से सजी यह फिल्म है पूरी की पूरी पैसा वसूल. तो मेरी सलाह मानिये, इस वीकेंड के टिकट्स अभी से बुक करा लें. कहीं ऐसा न हो कि बाद में आपको टिकट्स ही न मिलें.

फिल्म का नाम: बेफिक्रे

अरे चिंटू रेटिंग: 4 स्टार्स

निर्देशक: आदित्य चोपड़ा

कलाकार: रणवीर सिंह और वाणी कपूर

संगीत: विशाल-शेखर

शैली: रोमांस-ड्रामा

नीचे दिए बटन को क्लिक करके इस पोस्ट को मित्रों में शेयर करें