शशि कपूर ने सपनों के खातिर चुना संघर्ष का रास्ता

फिल्मी जगत के एक और बड़े सितारे ने आज अपनी आंखे मूंद ली हैं, इस खूबसूरत हस्ती को आप शशि कपूर के नाम से हमेशा से जानते हैं और आगे भी याद करेंगे। जी हां, बॉलीवुड में अपनी सदाबहार फिल्मों और गानों में योगदान देकर, अपने फैंस की यादों में अपनी छवि छोड़ शशि कपूर ने जीवन को अलविदा कह दिया है। सिर्फ बॉलीवुड इंडस्ट्री के लिए ही ये दुखद नहीं है बल्कि इस दुख में सारा देश शामिल है। आइए शशि कपूर को उनकी कुछ अनजानी बातों के जरिये उनके जीवन के सफर को एक बार फिर ताजा करते हैं।

Mumbai: Actor Shashi Kapoor during the closing ceremony of Jagran Film Festival in Mumbai on Oct 4, 2015. (Photo: IANS)

शशि कपूर ने अपने जीवन का सफर 18 मार्च 1938 को शुरु किया था। शशि कपूर उर्फ बलबीर राज कपूर यूं ही शशि कपूर नहीं बन गए, शशि हमेशा से फिल्मों में काम करना चाहते थे लेकिन शशि के पिता ने उनका साथ देने से इंकार कर दिया। अब शशि को फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान खुद ही बनानी थी। सपनों के खातिर शशि ने संघर्ष को अपना रास्ता बनाया और आज बॉलीवुड के नायाब सितारों में से एक हैं शशि कपूर।

Shashi Kapooor
Photo Credit: The Quint

शशि कपूर ज्यादातर खुद को शूटिंग में बिजी रखते थे। जिस पर राज कपूर उन्हें ‘टैक्सी’ भी बुलाते थे। इस दौरान शशि कपूर कई लोगों की टिप्पणी का शिकार होते थे, लेकिन एक दिन में 3 से 4 फिल्मों की शूटिंग करना आसान नहीं होता होगा। हालांकि, शशि के काम की इस रफ्तार ने उनके करियर को जरुर धीमा कर दिया था, लेकिन शशि जानते थे कि धीमी रफ्तार का मतलब रुकना नहीं होता बल्कि रफ्तार बढ़ाने की तैयारी होती है।

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शशि ने एक बाल- कलाकार के रुप में 1961 में रिलीज हुई फिल्म ‘धर्म- पुत्र’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की लेकिन इस फिल्म ने शशि को कुछ खास सफलता नहीं दी, लेकिन किस्मत से न हारने वाले शशि ने 1965 में रिलीज हुई फिल्म ‘जब- जब फूल खिले’ में अपने मोहब्बत भरे अंदाज में दर्शकों को खूब लुभाया। इस फिल्म के ज्यादातर गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
शशि कपूर ने अंग्रेजी फिल्मों में भी काम किया है, जिसमें से कॉनराड रुक्स की फिल्म ‘सिध्दार्थ’ में की एक तस्वीर को लेकर काफी विवाद हुए। दरअसल इस तस्वीर में सिमी गरेवाल और शशि कपूर आमने- सामने खड़े थे और सिमी को इसमें न्यूड दर्शाया गया था।
एक अभिनेता के रुप में अपनी पहचान बनाने के बाद शशि ने अपने हुनर को और निखारने की सोच के साथ प्रोडक्शन की और रुख किया। 80 के दशक में शशि की पहली फिल्म ‘जुनून’ रिलीज हुई, जो कि शशि के प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनाई गई। 90 का दशक आते- आते शशि की तबीयत में धीलापन आया, जिसके चलते वो फिल्मों से गायब होते चले गए।
शशि कपूर को 2011 में पद्म भूषण और 2014 में दादा साहेब फालके पुरस्कारों के साथ सम्मानित किया गया। अपने परिवार में शशि कपूर वो तीसरे व्यक्ति थे, जिन्होंने दादा साहेब फाल्के पुरस्कार पाया है।

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